पंचकूला नगर निगम की वार्डबंदी और 5 साल में अनुसूचित जाति की आबादी 29000 घटने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

Panchkula Municipal Corporation

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हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 18 फरवरी, 2026 तय की

पंचकूला, 22 जनवरी : Panchkula Municipal Corporation: पंचकूला नगर निगम की वार्डबंदी और बीते पांच साल में अनुसूचित जाति की आबादी 29212 घटने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। यह जानकारी वीरवार को यहां रेड बिशप में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबाला सांसद वरुण चौधरी ने दी। उनके साथ पंचकूला नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र रावल और याचिकाकर्ता भी उपस्थित रहे।

सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि पंचकूला नगर निगम के पूर्व पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आग्रह किया है कि पंचकूला, अंबाला, सोनीपत नगर निगम में मेयर पद का ड्रा 22 जनवरी, 2026 को निकालने के लिए जारी पत्र पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि पंचकूला नगर निगम में अनुसूचित जाति के पहले से आरक्षित चार वार्डों को घटाकर तीन किया गया है, उस पर भी रोक लगाने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि यह याचिका पूर्व पार्षदों ऊषा रानी, सलीम खान, परमजीत कौर, गुरमेल कौर, पंकज, संदीप सिंह और नरेश रावल ने दायर की है। सांसद ने कहा है पूर्व अध्यक्ष और एडवोकेट रविंद्र रावल ने यह केस तैयार करवाया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ में इस याचिका पर 20.01.2026 को सुनवाई हुई। खंडपीठ ने प्रतिवादीगण को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 18.02.2026 तय की है।

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पंचकूला नगर निगम में एससी के वार्ड चार से घटकर तीन कर दिए गए, बीसी ए और बीसी बी के वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए

सांसद वरुण चौधरी ने कहा कि याचिका में जानकारी दी गई है कि सरकार ने पंचकूला नगर निगम में कुल 20 वार्डों में से अनुसूचित जाति के पहले चार वार्ड थे मगर अब घटाकर तीन कर दिए। इसी तरह बीसी ए और बीसी बी कैटेगरी के लिए एक-एक वार्ड आरक्षित कर दिया और दोनों वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए। यानी 100 फीसदी आरक्षण दे दिया जबकि एक तिहाई ही आरक्षण देने का प्रावधान है। उन्होंने याचिका में आग्रह किया है कि वार्डों को आरक्षित करने वाले आदेश को रद्द किया जाए

पंचकूला नगर में आबादी परिवार पहचान पत्र से ली गई इसलिए चुनौती दी गई

सांसद वरुण चौधरी और एडवोकेट रविंद्र रावल ने कहा कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम में प्रावधान है कि अंतिम बार प्रकाशित जनगणना को वार्डबंदी का आधार माना जाता है। मगर सरकार ने अधिनियम में बदलाव कर परिवार पहचान पत्र के डाटा को आधार बना दिया। उन्होंने कहा कि पंचकूला नगर निगम में 2012 में अनुसूचित जाति की आबादी 47223 थी जबकि 2020 में अनुसूचित जाति की आबादी 70679 थी। अब 04.09.2025 को यह आबादी 41467 दिखाई गई है। यानी पांच साल में 29212 आबादी घट गई है। याचिका में कहा गया है कि यह संभव नहीं है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने लिखा है कि अनुसूचित जाति की आबादी तो अंतिम प्रकाशित जनसंख्या से ली जाएगी जबकि बीसी ए और बीसी बी के वार्ड आरक्षित करने के लिए आबादी परिवार पहचान पत्र से ली जाएगी। याचिका में कहा गया है कि इस तरह दो अलग-अलग मानदंड नहीं अपनाए जा सकते। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने वार्डबंदी के लिए आबादी परिवार पहचान पत्र के डाटा से लेने का प्रावधान किया है।

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न सीमा बढ़ी, न घटी, न वार्ड संख्या बढ़ी, न घटी फिर भी वार्डों की सीमा बदल गई

दोनों नेताओं ने कहा कि वर्ष 2020 में पंचकूला नगर निगम की जो सीमा थी, 2025-2026 में भी वही सीमा है। पंचकूला नगर निगम की सीमा में न तो कोई क्षेत्र शामिल हुआ है और न ही सीमा से बाहर हुआ है। यह भी जानकारी दी है कि 2020 में पंचकूला नगर निगम के वार्डों की संख्या 20 थी और 2025 में भी सरकार ने वार्डों की संख्या 20 ही तय की है। याचिका में सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब निगम की सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ, वार्डों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ तो वार्डों की सीमाएं कैसे बदल गई? याचिका में कहा गया है कि सरकार ने पंचकूला 04.10.2012 को बताया था कि 2001 की आबादी के अनुसार पंचकूला की आबादी 3,14,657 थी जबकि 29.07.2020 को यह आबादी 3,17,476 दिखाई थी। मगर अब 04.09.2025 को पंचकूला नगर निगम की आबादी 2,91,224 बताई है। किसी डाटा की अनुपस्थिति में यह समझ से परे है कि पंचकूला की आबादी कैसे घट गई? अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी और अगली जनगणना 2027 में शेड्यूल है। इसलिए प्रतिवादीगण की कार्रवाई और यह अधिसूचना स्पष्ट तौर पर मनमानी है।